रमा बाई अम्बेडकर बालिका इंटर कॉलेज
साबरपुर-गोण्डा
Virendra Prasad (Manager)
प्रबन्धक की कलम से....
हम नए जमाने की तड़क-भड़क, गाडी मोटर की पों-पों, मिल कारखानों के धुँए-धक्कड़ व शोर गुल, चिल्लाहट से दूर इस विद्यालय को जो मूर्तरूप दिया है वह महज इसी धारणा से कि स्वच्छ वातावरण में बच्चे स्वच्छ व आजादी से श्वांस ले, घूटन न महसूस करें। शहर की गली-कूची, सड़ी-गली चीजों की बदबू व गंदे मार्ग से इन्हे गुजरना न पड़े। जैसे नेहरू का आनंद भवन, गाँधी का साबरमती आश्रम आज भी वैसा हरा भरा बना हुआ है। वह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। मैंने भी ऐसा ही कुछ प्रयास किया है। हमने इन बातों का ध्यान रखा है। बच्चे स्वस्थ रहेंगे तो उनके दिल दिमाग में स्वस्थ बातें आएगी। वे अपना चरित्र भी यहाँ से उज्जवल बना के जायेंगे। जिस तरह पत्थरो को तराश कर नक्काशी करके कलाकार बहुमूल्य आकृतियाँ बनाते है तो उसकी कला समाज में प्रदर्शित होने पर प्रेरणा का स्रोत बन जाती हैं, उसी तरह हमारे कॉलेज के शिक्षक छात्र/छात्राओं को तराश कर ऐसा मेधावी बनाकर भेजते हैं, जो अच्छी-2 प्रतियोगिताओ को पास करके या अन्य प्रतिष्ठानो में उचित पद पते हैं, उस समय हमारे कॉलेज की गरिमा और भी बढ़ जाती हैं। हालाँकि हमारा विद्यालय गरीबों, मजदूरों, असहायों के बच्चो के लिए ही नहीं बल्कि सभी वर्गों, समुदायों के साधारण व आमिर घरो के बच्चो के लिए भी हैं ताकि इसे कोई अन्यथा न समझे। हम तो यही कहना चाहते थे कि वो लोग धनाभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रह जायें। हमसे जो बन पड़ेगा उनके लिए सहयोग करेंगे। आपके विद्यालय को और अच्छा बनाने के लिए महीने में एक बार सभी अध्यापक/अध्यापिकाओं के साथ निदेशक कि अध्यक्षता में एक मीटिंग कराई जाती है, जिसमे कॉलेज के विभिन्न तरह के पहलुओं पर चर्चा कि जाती है, जैसे कॉलेज कि गुणवत्ता पर विशेष रूप से सबकी राय लेना, बच्चे कि बुद्धि धारिता, विभिन्न स्वभाव वाले बच्चो के एकरूपता में ढालना, कौन किस विषय में कमजोर है उसे विशेष रूप से संध्याकालीन कोचिंग में भेजना तथा उसकी कमजोरी को दूर करने के उपायों पर चर्चा कि जाती है और उसे एक रजिस्टर में अंकित किया जाता है। अगले माह पुनः उसमे कितना सुधार हुआ जानकारी हासिल कि जाती है। यहाँ पर बच्चो को मनोविज्ञानिक ढंग से शिक्षा दी जाती है। उन्हें आगे बढ़ने के लिए बराबर प्रोत्साहित किया जाता है। इस वर्ष हमने प्रयास करके कला वर्ग में छूटे विषय गृहविज्ञान, कला, इतिहास एवं मनोविज्ञान तथा कॉमर्स वर्ग कि मान्यता भी प्राप्त कर लिया। इस वर्ष से इन विषयो कि कक्षाएँ सुचारु रूप से संचालित की जायेंगी।
Mrs. Vijya Bharti (Principal)
प्रधानाचार्य की कलम से.....
आप सभी का हदयसे स्वागत करती हूँ..! - शिक्षावह नीव है जिसपर हम अपने भविष्यका निर्माण करते है। हमारीचिंता का व्यापक मानदंडछात्रों को शहर, राज्यराष्ट्र वास्तव में विश्वस्तर कासच्चा नागरिक बनाना है। साथ हीसम्मान, सहानुभूति, प्रेम, इमानदारी और सबसे ऊपर"मानवता का गुण” उत्पन्नकरना है।मेरामानना है कि ....शिक्षामें जितनी भूमिका विद्यार्थी की है उतनीही शिक्षक की है.. हमारेशिक्षक संभावनाओं से भरे विद्यार्थीरूपी कच्ची मिट्टी को सार्थक मूर्तरूप देने में पूर्णतःसक्षम है। नियमित कक्षाएं,कैरियर मार्गदर्शन, संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास, mentoring (सलाहकर) , शोध, परियोजना, सेमिनार,मूल्य वर्धित पाठ्यक्रम (Value Addedcourse) जैसे विभिन्न टीचिंग-लर्निंग माध्यम से हमारे शिक्षकग्रामीण अंचल के सरल-सहज विद्यार्थियों कोसुदृढ़ व्यक्तित्व में परिवर्तित कर सामाजिक दायित्वों के निर्वहन केलिए परिपक्व कर रहे हैं। छात्राओंकी बाहुल्यता के युक्त (लगभग80%) हमारी संस्था जहाँ बलिकाओं केलिए वातावरण, सुविधाओं एवं सुरक्षा हेतुसजग है वहीं बालकोंमें स्वस्थ मन व नैतिकताका संचार करने हेतु भीक्रियाशील है। जिससे नकेवल संस्था में अपितु अपनेनिवास, गांव व समाजमें भी छात्र वछात्राएं समानता व स्वस्थ आचारका निर्वाह कर सके। इसमेंअनुभवी और परिपक्व शिक्षक,समर्पित विद्यार्थीगण, विद्यालय का विशाल परिसर,मूलभूत सुविधाएँ मुख्य भूमिका निभा रही हैंऔर विद्यालय उन्नति की चरम सीमापर पहुँच रहा है
Our Cultural Programme
We aim at inspiring our students to dream more, learn more, do more, and become more in their respective journeys of life.